क्रिप्टोकरेंसी

क्रिप्टोकरेंसी क्या है, कैसे काम करती है और भारत मार्किट

क्रिप्टोकरेंसी क्या है, कैसे काम करती है और भारत मार्किट 

क्रिप्टोकरेंसी  word आपने कई बार सुना होगा क्योंकि चाहे Elon Musk हो या फिर Warren Buffett कोई भी क्रिप्टोकरेंसी के नाम से अछूता नहीं  है।  अग़र आप क्रिप्टो के बारे में नहीं जानते है तो ये Article आपके लिए है। इस Article में हमने क्रिप्टोकरेंसी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी है, जो आपको इस वर्चुअल करेंसी को समझने में वहुत मदद मिलेगी।

 क्या है क्रिप्टोकरेंसी !

आसान भाषा में कहे तो क्रिप्टोकरेंसी डिजिटिल फोर्म में है जो एक डिजिटल क़ैश प्रणाली है जिसे कंप्यूटर के कोडिंग language के algorithem पर काम करती है। ये डिजिटल फॉर्म उसी तरह सुरक्षित है  जिस तरह अन्य देशों की मुद्रा। यह एक वर्चुअल करेंसी है जिसे छुआ नहीं जा सकता। आजकल इस मुद्रा का चलन काफी बढ़ता जा रहा है, इस डिजिटल क्रिप्टो करेंसी का उपयोग इंटरनेशनल मार्किट में खरीदारी, इन्वेस्टमेंट और सर्विसेज़ में किया जा रहा है। इसका उपयोग आप कहीं भी किसी भी Time कर सकते है और साथ ही इन्वेस्ट करके अपने पैसे में मुनाफा कमा सकते है।

क्रिप्टोकरेंसी का इतिहास

क्रिप्टोकरेंसी के जनक सातोशी नकामोटा को माना जाता है जो  2009 में पहली Decenterlized क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin Introduced की थी लेकिन इस पर प्रश्न चिन्ह तब लग जाता है जब ऐसा कहा जाता है की क्रिप्टोकोर्रेंसी जैसा ही करेंसी यूएस ने 1996 में डिजिटल फोम में गोल्ड बनाया था जिसे 2008 में वैन कर दिया गया।  क्रिप्टोकरेंसी(criptocurrency ) दो word से मिलकर बनी है, Cripto जिसका लैटिन भाषा के Criptography  से बना है जिसका मतलब होता है छुपा हुआ , उसी तरह Currency लैटिन भाषा के Currentia से आया है जिसका मतलब होता है पैसा। ये एक ऐसी मुद्रा है जिस पर किसी का अधिकार नहीं है।

कैसे काम करती है क्रिप्टोकरेंसी

जब हम ऐसी मुद्रा के बारे में बात करते है जो डिजिटल है और जिस पर किसी का अधिकार न हो तो मन में ये सवाल आता है की ये मुद्रा काम कैसे करती है। असल में यह एक व्लॉक चैन सॉफ्टवेयर है जिसमें ये मुद्रा एन्क्रिप्टेड है  मतलव कोडेड है जिसे Decenterlized सिस्टम के जरिये मैनेज किया जाता है। इसमें प्रत्येक लेन -देन का हिसाब होता है जिसे Signature से verified किया जाता है। क्रिप्टोग्राफी के साथ इसका रिकार्ड रखा जाता है जिसके द्वारा किया गया लेन -देन क्रिप्टो माइनिंग (Cripto mining ) कहलाता है और जिनके द्वारा ये माइनिंग की जाती है उन्हे Miners कहा जाता है।  ये बहुत बड़े -बड़े कम्प्यूटर्स के द्वारा की जाती है। इनके कोड को हैक करना नामुमकिन होता है इसलिए ये सुरक्षित मानी जाती है।

देशों का नजरिया

कुछ देश इस करेंसी को अपना चुके है जबकि कुछ देशों ने इसे नहीं अपनाया है इसका सीधा कारण इसके अनोखे रूप और अधिकार क्षेत्र की वजह से है। नए निवेशक आने से इस मुद्रा की Value में बढ़ोतरी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा Famous मुद्रा Bitcoin है जिसे तब ये बोला गया था यह मुद्रा 100 -200 डॉलर इसकी Value होने के बाद ये बाजार से ख़त्म हो जाएगी लेकिन आज Bitcoin की कीमत 1 Bitcoin =33 लाख  रूपये  होने के बाद हम ये नहीं कह सकते की वर्चुअल मुद्रा पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

क्रिप्टोकरेंसी के प्रकार

April,2021 तक लगभग 10000 प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी हो गयी है। इस बात से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या होने वाला है। Cripto में सबसे ज्यादा फेमस Bitcoin है, इसके अलावा और भी Cripto काफी Famous हो रही है जैसे –

RankNameSymbol
1BitcoinBTC
2EthereumETH
3Binance CoinBNB
4CardanoADA
5TetherUSDT
6XRPXRP
7DogecoinDOGE
8USD CoinUSDC
9PolkadotDOT
10UniswapUNI

इनके अलावा भी काफी क्रिप्टोकरेंसी हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का मार्किट

भारत में क्रिप्टोकरेंसी खरीदने बेचने या फिर किसी भी तरह की सर्विस लेने के लिए कुछ वॉलेट उपयोग में लिए जाते हैं। इनमे से मुख्यत Zebpay , Wazirx , Kuver इत्यादि ऐप के जरिये वड़ी आसानी से इनकी ट्रेडिंग की जाती है। इनके साइनअप के लिए कुछ डॉक्यूमेंट की जरुरत होती है जैसे आधार कार्ड, पैनकार्ड, बैंक पासबुक आदि। अगर आपको जानना है कि साइन अप और ट्रेडिंग कैसे की जाती है तो आप मेरे Link को फॉलो कीजिये। इस Pic पर click कीजिये।

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भारतीय रिज़र्व बैंक और क्रिप्टो करेंसी

भारतीय रिज़र्व बैंक ने क्रिप्टो को कभी भी आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है तथा इसे अवैध भी करार नहीं किया है क्योंकि क्रिप्टो पर किसी का अधिकार नहीं है तो rbi इसे ज्यादा तवज्जो नहीं देता है इसलिए ही rbi ने अपनी खुद की डिजिटल करेंसी रेगुलेट करने के बारे में कहा है।  सूत्रों से पता चला है की rbi इस साल के अंत तक अपनी करेंसी लेकर आ सकता है जो क्रिप्टो की तरह ही वर्क करेगी पर उसका रेगुलेशन rbi ही करेगा।  इस करेंसी का नाम होगा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central bank digital currency ) होगा।

क्रिप्टोकरेंसी के लाभ

  • क्रिप्टोकरेंसी के लेन -देन कहीं से भी किया जा सकता है और किसी भी टाइम।
  • इस तरह की करेंसी में गोपनीयता बहुत होती है जिसकी वजह से लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहती है।
  • इन करेंसी  का उपयोग विश्व में कहीं भी किया जा सकता है बिना किसी अतरिक्त शुल्क के।
  • कोई भी व्यक्ति इसका उपयोग कर सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी के दुष्परिणाम

  • इस पर किसी देश का अधिकार न होने की वजह से विश्वसनीयता पर सवाल उठना।
  • इसकी गोपनीयता के कारण आंतकवादी या अन्य गैरकानूनी धंधो का इसका लाभ उठाना।
  • क्रिप्टो पर सरकार की मौद्रिक नीतियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए उनकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभावः पड़ना।

क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य

क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य उसके इन्वेस्टर और ट्रेडिंग के भरोसे पर निर्भर रहेगा।  कई देशों ने इसे अपनाकर और वड़े -वड़े इन्वेस्टरों ने इसमें पैसा लगाकर इस पर भरोसा  जताया गया है और इसका नतीजा इसकी आर्थिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ना।  आज लोग धीरे -धीरे जागरूक हो रहे हैं साथ ही इसमें इन्वेस्ट करके अच्छा मुनाफा भी कमा रहे है।  वहीँ दूसरी और कुछ देशों में इसे सही नहीं माना  जा रहा है क्योंकि इसकी रेगुलेटरी कोई भी नहीं है तो इसकी जवावदेही भी किसी की नहीं बनती।  वैसे यह भी देखा जा  रहा है की कुछ देश रेगुलेटरी के साथ अपनी -अपनी डिजिटल मुद्रा को लाने की तैयारी भी कर रहे हैं।  इससे यह कहा जा सकता है की क्रिप्टो आगे चलन में आएगी जो आजकल दिख भी रहा है।

निष्कर्ष

क्रिप्टोकरेंसी की इस बात में कोई दोहराह नहीं है कि यह व्यापार,निवेश और अन्य बिभिन्न क्षेत्रों में तेज़ और काम खर्च वाली डिजिटल प्रणाली है लेकिन फिर भी अगर वर्तमान स्वरुप पर गौर किया जाये तो इसकी गोपनीयता, अस्थिरता और इसकी नीति की वजह किसी भी देश को अनिवार्यता देना बहुत मुश्किल होगा। लेकिन भविश्य को अगर देखा जाये तो इसमें उपलब्ध अवसरों को ध्यान में रखते हुए सरकार और क्रिप्टोकरेंसी के बीच समन्वय को बढ़ाने पर वाल देना होगा साथ ही जन जागृति भी लानी होगी जिससे एक हितकारी तंत्र बन सके।

 

 

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